आदि जगद्गुरु शंकराचार्य जी और चार धाम की स्थापना
सुरेन्द्र सिंह राजपुरोहित |
21 Sep 2025
आदि जगद्गुरु शंकराचार्य जी ने पूरे भारत को आध्यात्मिक रूप से एकीकृत करने और हिंदू धर्म को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से चार धाम की स्थापना की थी। उन्होंने पूरे उपमहाद्वीप की यात्रा की और हिंदू मान्यताओं को एकजुट किया, जिससे बिखरे हुए हिंदुओं को एक साझा आध्यात्मिक यात्रा के अंतर्गत लाया जा सके और उन्हें मोक्ष या मुक्ति मिल सके।
आध्यात्मिक एकीकरण: आदि शंकराचार्य ने भारत के विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को एक साझा धार्मिक यात्रा के माध्यम से जोड़ने के लिए चार धाम सर्किट की स्थापना की थी
सनातन धर्म का पुनरुद्धार: उस समय मुस्लिम शासकों और अन्य धर्मों के शासनकाल के कारण हिंदू धर्म लगभग लुप्त हो चुका था, इसलिए आदि शंकराचार्य ने इसे पुनर्जीवित करने और पुनः स्थापित करने के लिए यह प्रयास किया
मोक्ष की प्राप्ति: माना जाता है कि इन चार धामों की यात्रा करने से व्यक्ति को जन्म और पुनर्जन्म के कर्म चक्र से मुक्ति मिलती है, जिसे मोक्ष कहते हैं
सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान: प्रत्येक धाम भारत के चारों कोनों में स्थित है और यह विभिन्न युगों का प्रतिनिधित्व करता है, जिससे लोगों को अपनी प्राचीन परंपराओं से जोड़ा जा सके।
जिसमें रामेश्वर, द्वारका, जगन्नाथ पुरी और बद्रीनाथ धाम हैं जो भारत के चार धाम मैं आते हैं इन चारों धाम में सनातन धर्म रक्षा के लिए चार वेदों के हिसाब से इन चारों धामों में चार पीठ की स्थापना की
और इन पर चार शिष्यों की स्थापना की जो उत्तर पुर्व पश्चिम और दक्षिण दिशा को देखते हुए एक से एक विद्यमान यहा स्थापित हैं जिन्हें हम धर्म वाहक धर्म रक्षक जगद्गुरु शंकराचार्य भगवान कहते हैं
1 बद्रीनाथ धाम: विष्णु को समर्पित यह तीर्थ सत्युग का प्रतीक है यहा ज्योतिष्पीठ है जहां ज्योतिष पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज जगद्गुरु शंकराचार्य जी के रूप में है
2 रामेश्वरम धाम: भगवान शिव को समर्पित यह तीर्थ त्रेतायुग का प्रतीक है यह दक्षिण दिशा में हैं जहां श्रृंगेरी स्थित शारदा पीठ पर तीर्थ भारती जी महाराज जगद्गुरु शंकराचार्य जी के रूप में है
3द्वारका धाम: भगवान कृष्ण को समर्पित यह तीर्थ द्वापरयुग का प्रतीक है
जहां द्वारका शारदा पीठ पर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री सदानंद सरस्वती जी महाराज जगद्गुरु शंकराचार्य जी के रूप में है
4- पुरी धाम (जगन्नाथ पुरी): भगवान जगन्नाथ को समर्पित यह तीर्थ कलियुग का प्रतीक है. जहा जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज जगद्गुरु शंकराचार्य जी के रूप में है
चार धाम का अर्थ "भगवान के चार निवास" है और इसमें चार मुख्य तीर्थ स्थल शामिल हैं: उत्तर में बद्रीनाथ, पूर्व में पुरी, दक्षिण में रामेश्वरम और पश्चिम में द्वारका। प्रत्येक धाम भारत की अलग-अलग दिशा में स्थित है और इन्हें हिंदू धर्म में मोक्ष प्राप्ति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।